उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na koi subh ka manzar na sham ki taswir

न कोई सुब्ह का मंज़र न शाम की तस्वीर

نہ کوئی صبح کا منظر نہ شام کی تصویر

शायर: Babar Zuhrab7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न कोई सुब्ह का मंज़र न शाम की तस्वीर
सुकूत खींच रहा है कलाम की तस्वीर

रखेंगे नक़्श मोहम्मद का दिल में ताकि रहे
हमारे पास हमारे इमाम की तस्वीर

ये सुब्ह-ओ-शाम के मंज़र में वक़्त का किरदार
ये रोज़-ओ-शब हैं 'अजब एहतिमाम की तस्वीर

पिएँगे दिल से शहादत का जाम बरसर-ए-ख़ाक
कि है ये मौत हमारे दवाम की तस्वीर

जहाँ-जहाँ से वो गुज़रा ज़माना रुक गया था
हर इक मक़ाम ने खींची ख़िराम की तस्वीर

वो आँख जिस को मयस्सर हो वो नहीं रखता
ये जाम-ए-जम का तसव्वुर ये जाम की तस्वीर

ज़मीं पे बिजली गिराई गई है यूँ 'ज़हराब'
बना रहा है ख़ुदा इंहिदाम की तस्वीर