उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na jaane kaun tha aur kya wo karne wala tha

न जाने कौन था और क्या वो करने वाला था

نہ جانے کون تھا اور کیا وہ کرنے والا تھا

शायर: Balraj Bakhshi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न जाने कौन था और क्या वो करने वाला था
मिरे क़रीब से छुप कर गुज़रने वाला था

किसी ने खींच ली सीढ़ी तो गिर के टूट गया
मैं सख़्त-जान कहाँ ऐसे मरने वाला था

तमाम शहर में ए'लान कर दिया तुम ने
मैं क़र्ज़ ले के भला कब मुकरने वाला था

न जाने कैसे वही शख़्स डर गया मुझ से
कि जिस को देख के मैं ख़ुद ही डरने वाला था

मिरी नज़र ही न 'बलराज' लग गई हो उसे
वो चाँद जो मिरी छत पर उतरने वाला था