उर्दू शायरी · ग़ज़ल

musalsal mujassam duaen salamat rahen

मुसलसल मुजस्सम दु'आएँ सलामत रहें

مسلسل مجسم دعائیں سلامت رہیں

शायर: Umair Najmi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुसलसल मुजस्सम दु'आएँ सलामत रहें
सलामत रहें सब की माएँ सलामत रहें

हमारे भी है आगे पीछे कोई कह सकें
ये जो लोग हैं दाएँ-बाएँ सलामत रहें

अगर साथ चलना है आएँ जी ख़ुश-आमदीद
अगर जा रहे हैं तो जाएँ सलामत रहें

मिरे घर के दरवाज़े पर भी हुईं दस्तकें
गली से गुज़रती हवाएँ सलामत रहें

सलामत हैं सब महफ़िलें इन के डर के तुफ़ैल
ये तन्हाई जैसी बलाएँ सलामत रहें

तुझे ख़ामुशी का पता ही नहीं वर्ना तू
मिरे साथ कहता सदाएँ सलामत रहें

वो दिल जो धड़कते हैं पत्थर नहीं उन की ख़ैर
वो आँखें जो आँसू बहाएँ सलामत रहें

ख़ुद आता था पहले और इस बार बस इक पयाम
जनम-दिन की शुभकामनाएँ सलामत रहें

मिरा क्या है पहले से टूटा हुआ हूँ 'उमैर'
बस इन दोस्तों की अनाएँ सलामत रहें