उर्दू शायरी · ग़ज़ल

musafiron ki tarah rahguzar mein rahta hai

मुसाफ़िरों की तरह रहगुज़र में रहता है

مسافروں کی طرح رہ گزر میں رہتا ہے

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुसाफ़िरों की तरह रहगुज़र में रहता है
ये रास्ता भी मुसलसल सफ़र में रहता है

हर एक कमरे में आईना इस लिए रक्खा
लगे कि कोई मिरे साथ घर में रहता है

कोई लगा ले अगर एक कश उदासी का
तो फिर वो उम्र भर उस के असर में रहता है

अजीब हाल है तुझ से बिछड़ के भी अब तक
ये दिल तुझी से बिछड़ने के डर में रहता है

अगर मैं जान भी दे दूँ तो कोई उफ़ न करे
अगर वो उफ़ भी करे तो ख़बर में रहता है