उर्दू शायरी · ग़ज़ल

musafir ke kuchh kaam aata nahin

मुसाफ़िर के कुछ काम आता नहीं

مسافر کے کچھ کام آتا نہیں

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुसाफ़िर के कुछ काम आता नहीं
सितारा अगर जगमगाता नहीं

तमाशा तो दिलचस्प है आप का
मगर हैरतों को बढ़ाता नहीं

इज़ाफ़ा करेगा मिरी ज़ात में
वही रंग जो हाथ आता नहीं

तिरे सिलसिले के हैं सब नक़्श-गर
कोई भी नया कुछ बनाता नहीं

अगर साँस का नाम ही रक़्स है
तो क्यों वज्द में कोई आता नहीं

ये घर टूट जाने की मंज़िल पे है
ये घर अब किसी को मनाता नहीं