उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe pahle to lagta tha ki zati masala hai

मुझे पहले तो लगता था कि ज़ाती मसअला है

مجھے پہلے تو لگتا تھا کہ ذاتی مسئلہ ہے

शायर: Umair Najmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझे पहले तो लगता था कि ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत काएनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा-ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

हमें थोड़ा जुनूँ दरकार है थोड़ा सुकूँ भी
हमारी नस्ल में इक जीनियाती मसअला है

बड़ी मुश्किल है बनते सिलसिलों में ये तवक़्क़ुफ़
हमारे राब्तों की बे-सबाती मसअला है

वो कहते हैं कि जो होगा वो आगे जा के होगा
तो ये दुनिया भी कोई तजरबाती मसअला है

हमारा वस्ल भी था इत्तिफ़ाक़ी मसअला था
हमारा हिज्र भी है हादसाती मसअला है