उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhko is moD par chhoD jaane ke baad

मुझ को इस मोड़ पर छोड़ जाने के बाद

مجھ کو اس موڑ پر چھوڑ جانے کے بعد

शायर: Dard Faiz Khan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझ को इस मोड़ पर छोड़ जाने के बाद
क्या मिलेगा तुझे दिल दुखाने के बा'द

चेहरे अहबाब के फिर उतरने लगे
जब हँसे हम कभी ग़म छुपाने के बाद

रिज़्क़ के वास्ते घर से निकला था मैं
दिल मसर्रत में है कुछ कमाने के बाद

ज़िंदगी की हक़ीक़त समझ आ गई
बारिशों में पतंगें उड़ाने के बाद

देख ले जा के तारीख़-ए-कर्ब-ओ-बला
और ऊँचा हुआ सर कटाने के बाद

ऐसा बिखरा हुआ है तिरा 'फ़ैज़' अब
जैसे शीशा कोई टूट जाने के बाद