उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhko hoti thi aagahi tanha

मुझ को होती थी आगही तन्हा

مجھ کو ہوتی تھی آگہی تنہا

शायर: Aarib Hashmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझ को होती थी आगही तन्हा
कि अंधेरे में रौशनी तन्हा

सहन में मातमी लिबादे हैं
लाश कमरे में है पड़ी तन्हा

शहर के बीच लग गया कतबा
जल गई एक झोंपड़ी तन्हा

उस को तन्हाई मार डालेगी
रह गया जो भी आदमी तन्हा

बारिशों में वो खेलती लड़की
आज ज़ीने पे रो पड़ी तन्हा

सुर्ख़ आँखें बता रहीं 'आरिब'
रात वो जागती रही तन्हा