उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat phul bhi hai Khaar bhi hai

मोहब्बत फूल भी है ख़ार भी है

محبت پھول بھی ہے خار بھی ہے

शायर: Sabir Abuhari8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत फूल भी है ख़ार भी है
ये वीराना भी है गुलज़ार भी है

फ़रोज़ाँ करके देखे शम-ए-दिल को
पतंगा पैकर-ए-अनवार भी है

कमाल-ए-आगही पर मरने वालो
कमाल-ए-आगही आज़ार भी है

तमाशा बन गया जिस का तहय्युर
नज़र वो लाएक़-ए-दीदार भी है

गो लाख आराम हो कुंज-ए-क़फ़स में
असीरी रूह का आज़ार भी है

यहाँ शाम-ओ-सहर बिकते हैं यूसुफ़
ये दुनिया मिस्र का बाज़ार भी है

जो दिल है ज़ामिन-ए-मेहर-ओ-मोहब्बत
वही दिल बानी-ए-पैकार भी है

वो 'साबिर' नाम है रिंदों में जिस का
सुना है महरम-ए-असरार भी है