उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat ne nahin chhoDa kahin ka

मोहब्बत ने नहीं छोड़ा कहीं का

محبت نے نہیں چھوڑا کہیں کا

शायर: Balwant Singh7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत ने नहीं छोड़ा कहीं का
वगरना मैं था बाशिंदा कहीं का

कभी कहता नहीं रुकने को ये दिल
उठा लाया है फिर नक़्शा कहीं का

भटकता फिर रहा हूँ दर-ब-दर मैं
किसी से पूछ कर रस्ता कहीं का

इधर से हम करें तारीफ़ सच्ची
उधर से तुम कहो झूटा कहीं का

कहाँ कर आए हम इज़हार-ए-उल्फ़त
कहीं पर हो गया सज्दा कहीं का

जिसे देखे करे पाने की ख़्वाहिश
ये दिल जैसे हो शहज़ादा कहीं का

मोहज़्ज़ब आदमी घर जा के अपने
उतारेगा कहीं ग़ुस्सा कहीं का