उर्दू शायरी · ग़ज़ल

laDte hue duniya ki zarurat ke liye hum

लड़ते हुए दुनिया की ज़रूरत के लिए हम

لڑتے ہوئے دنیا کی ضرورت کے لیے ہم

शायर: Balwant Singh7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लड़ते हुए दुनिया की ज़रूरत के लिए हम
मर जाएँगे इक रोज़ मोहब्बत के लिए हम

रक्खे नहीं हम से कोई इख़्लास की उम्मीद
बाज़ार में बैठे हैं तिजारत के लिए हम

दौलत न सियासत न क़यादत न हुकूमत
मुजरिम हैं फ़क़त अपनी जिहालत के लिए हम

दुनिया के हर इक लुत्फ़ को हम छोड़ दें वाइज़
इतने भी परेशाँ नहीं जन्नत के लिए हम

हिन्दी की हिफ़ाज़त के लिए जैसे थे 'रसखा़न'
वैसे ही हैं उर्दू की हिफ़ाज़त के लिए हम

ऐसे ही तो तलवार उठाते भी नहीं है
मजबूर हुए होंगे बग़ावत के लिए हम

जो हाल था पहले वही है हाल अभी भी
कुछ भी नहीं कर पाए मोहब्बत के लिए हम