उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi kitna bhi kahe shad nahin hota hai

कोई कितना भी कहे शाद नहीं होता है

کوئی کتنا بھی کہے شاد نہیں ہوتا ہے

शायर: Balwant Singh9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई कितना भी कहे शाद नहीं होता है
इक लुटा दिल कभी आबाद नहीं होता है

पैदा होते हैं फ़क़त इश्क़ की ख़ातिर दो चार
हर कोई मजनूँ या फ़रहाद नहीं होता है

होता आया है सदा ज़ख़्म ही पहले ईजाद
पहले मरहम कभी ईजाद नहीं होता है

ज़िंदगी अपना सबक़ और ज़रा मुश्किल कर
हम को आसान सबक़ याद नहीं होता है

अब हर इक बात पे होता है फ़क़त वा'दा-व'ईद
अब किसी बात पे संवाद नहीं होता है

कैसे उस शख़्स पे ला'नत नहीं भेजे कोई
इश्क़ कर के भी जो बर्बाद नहीं होता है

ऐसे जल्लाद से है अस्ल में ख़तरा सब को
अपने पेशे से जो जल्लाद नहीं होता है

हम मोहब्बत भला क्या ख़ाक करेंगे जाना
हम से तो कुछ भी तिरे बाद नहीं होता है

पढ़ लो तारीख़ जो इक बार हुआ मुल्क ग़ुलाम
फिर वो आसानी से आज़ाद नहीं होता है