उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat ke nashe mein chhan-chhanan karte hue kangan

मोहब्बत के नशे में छन-छनन करते हुए कंगन

محبت کے نشہ میں چھن چھنن کرتے ہوئے کنگن

शायर: Lankesh Gautam6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत के नशे में छन-छनन करते हुए कंगन
तिरे हाथों में आ कर और भी महँगे हुए कंगन

बड़ी मुश्किल से उस के बाप ने कंगन ख़रीदे थे
सुहागन तक रही है दूर से बेचे हुए कंगन

बिना मर्ज़ी के ये ज़ेवर फ़क़त बंधन बराबर हैं
नहीं जचते किसी के हाथ में बाँधे हुए कंगन

भले कुछ कर नहीं सकता मगर ये दुख तो है मुझ को
पराए हाथ में जाकर बहुत मैले हुए कंगन

वो अच्छे से समझती थी मिरे घर-बार की हालत
सो उस के होंट कन पे रुक गए कहते हुए कंगन

किसी ने तैश में आकर तिरे हाथों को झटका था
मिरे पाँव में चुभते हैं तेरे टूटे हुए कंगन