उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is se pahle koi hunar aae

इस से पहले कोई हुनर आए

اس سے پہلے کوئی ہنر آئے

शायर: Lankesh Gautam11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस से पहले कोई हुनर आए
शुक्र किरदार में उतर आए

अब मुकम्मल भटक चुका हूँ मैं
अब कोई रास्ता नज़र आए

मैं ने चलना तो बा'द में सीखा
पैर से पहले मेरे पर आए

तुम ये दीवार देखते रहना
क्या पता कोई नक़्श उभर आए

आप को तो शरीफ़ समझा था
आप भी अपनी पर उतर आए

ऐसे आता था मुझ से मिलने वो
जैसे मज़दूर काम पर आए

मैं तुझे सीन के रीहरसल में
देख लूँ और आँख भर आए

यूँ तो मुमकिन नहीं सफ़र करना
मेरी ख़्वाहिश है हम-सफ़र आए

पहले इक दायरा दिखा मुझ को
फिर कई दाएरे नज़र आए

हम अकेले ही उस के कूचे में
सब ज़मानों की आह भर आए

तेज़ बारिश हो सब दरख़्तों पर
जब कोई फूल शाख़ पर आए