उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHun se chhani hui aur jism se phaTki hui

ख़ून से छानी हुई और जिस्म से फटकी हुई

خون سے چھانی ہوئی اور جسم سے پھٹکی ہوئی

शायर: Lankesh Gautam8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ून से छानी हुई और जिस्म से फटकी हुई
ढूँढ़ लाया हूँ उदासी क़ैस की पटकी हुई

तंगी-ए-फ़ुर्क़त में इतना तंग था अपना बदन
वस्ल के माहौल में भी बात झंझट की हुई

जिस तरफ़ भी मुँह किया थी उस तरफ़ अपनी शिकस्त
आइने में 'ऐब था या आँख थी चटकी हुई

हल्के हल्के हाथ से काटा गया अपना गला
तेज़ चाक़ू बन गई थी ज़िंदगी झटकी हुई

खुल गया दर और फिर ज़ाहिर हुआ अन्दर का हाल
कितनी बदनामी हवा आने से चौखट की हुई

रात होते ही कई आँखों भरी 'औरत की रूह
घूरने लगती है मुझ को बाम से लटकी हुई

लौट आए हैं परिंदे दश्त में भटके हुए
लौट आई है उदासी ज़ह्न में भटकी हुई

'गौतम'-ए-ख़ामोश तुम को कुछ सुना आया तो क्या
एक मुद्दत से गले में फाँस थी अटकी हुई