उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chashm-e-farogh-e-dil ne dikhaya ba-faiz-e-‘aks

चश्म-ए-फ़रोग़-ए-दिल ने दिखाया ब-फैज़-ए-‘अक्स

چشم فروغ دل نے دکھایا بہ فیض عکس

शायर: Lankesh Gautam9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चश्म-ए-फ़रोग़-ए-दिल ने दिखाया ब-फैज़-ए-‘अक्स
इक अध-खुली नज़र को नज़ारा ब-फैज़-ए-‘अक्स

दिल में जुनूँ के आइने तरतीब से लगा
जलने लगेगा 'अक़्ल का सहरा ब-फैज़-ए-‘अक्स

दुनिया ब-फ़ैज़-ए-कुन है इन आँखों के दरमियान
देखेंगे दरमियान में दुनिया ब-फैज़-ए-‘अक्स

जलने लगेंगे होश के बिखरे हुए नुक़ूश
दिखने लगेगा रूह का साया ब-फैज़-ए-‘अक्स

पहले भी मौज-ए-ख़ुद-कुशी में आ चुका है दिल
पहचानता है मुझ को ये दरिया ब-फैज़-ए-‘अक्स

सोचें तो तीरगी भी नहीं रौशनी से कम
देखें तो दिख रहा है अँधेरा ब-फैज़-ए-‘अक्स

छटता है रफ़्ता-रफ़्ता ग़ुबार-ए-शब-ए-फ़िराक़
होता है रफ़्ता-रफ़्ता सवेरा ब-फैज़-ए-‘अक्स

शाम-ए-विसाल मुझ से टपकता था इतना नूर
दिखता नहीं था आप का चेहरा ब-फैज़-ए-‘अक्स

मौज-ए-ज़िया पे नक़्श है जो परतव-ए-ख़ुदा
ज़र्रात-ए-रौशनी में निहाँ था ब-फैज़-ए-‘अक्स