उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaise hi usne puchha ki rishta qubul hai

जैसे ही उस ने पूछा कि रिश्ता क़ुबूल है

جیسے ہی اس نے پوچھا کہ رشتہ قبول ہے

शायर: Lankesh Gautam5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जैसे ही उस ने पूछा कि रिश्ता क़ुबूल है
यक दम मिरी ज़बान से निकला क़ुबूल है

अब बात से पलटने नहीं दूँगा मैं तुम्हें
सपने में तुम ने मुझ से कहा था क़ुबूल है

मैं ने ये रास्ता कभी देखा नहीं मगर
तुम साथ हो तो मुझ को भटकना क़ुबूल है

तू भी कोई पराई अँगूठी पहन चुका
मैं भी किसी से कह चुका रिश्ता क़ुबूल है

मुझ को मिरे मिज़ाज का मिलता नहीं कोई
सो जैसा आप ढूँढ दें वैसा क़ुबूल है