उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat jo rakhti asar zindagi bhar

मोहब्बत जो रखती असर ज़िंदगी भर

محبت جو رکھتی اثر زندگی بھر

शायर: Umood Abrar Ahmad9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत जो रखती असर ज़िंदगी भर
नहीं रूठता हम-सफ़र ज़िंदगी भर

है कैसी ये उल्फ़त के तू ने कभी भी
न रक्खी मिरी कुछ ख़बर ज़िंदगी भर

लुटाते रहे वो जहाँ में मोहब्बत
हमें ही किया दर-ब-दर ज़िंदगी भर

ख़ुलासा बयाँ मेरी आँखें करेंगी
उठाया नहीं मैं ने सर ज़िंदगी भर

किया क़त्ल हाथों से जज़्बों का मैं ने
जला कर ये ख़ून-ए-जिगर ज़िंदगी भर

बनाना जो चाहा था हाथों से मैं ने
बना ही न पाई वो घर ज़िंदगी भर

है जो कुछ भी पाया उसे खो न दें हम
हमेशा रहा दिल में डर ज़िंदगी भर

'अदावत मोहब्बत से बेहतर ही होगी
रखी तुम ने क़ाएम अगर ज़िंदगी भर

सितम ढा रहे हैं मोहब्बत जता कर
है उन का ये हुस्न-ए-नज़र ज़िंदगी भर