उर्दू शायरी · ग़ज़ल

miTTi ka rang-rup banae hue hain log

मिट्टी का रंग-रूप बनाए हुए हैं लोग

مٹی کا رنگ روپ بنائے ہوئے ہیں لوگ

शायर: Kalim Akhtar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिट्टी का रंग-रूप बनाए हुए हैं लोग
लेकिन दिलों में संग छुपाए हुए हैं लोग

ऐ अब्र-ए-हक़-पसंद ज़रा झूम कर बरस
चेहरे पे झूटी शान जमाए हुए हैं लोग

चेहरे पे दोस्तों के रिया नाचती मिली
चाहत की कैसी धूप उगाए हुए हैं लोग

इस बार कौन दाम में आ जाए क्या ख़बर
मा'सूमियत का जाल बिछाए हुए हैं लोग

शायद वजूद अपना सलामत न रह सके
शो'ला-नुमा मिज़ाज बनाए हुए हैं लोग

दामान-ए-इश्तियाक़ का बचना मुहाल है
'अख़्तर' हवस की आग जलाए हुए हैं लोग