उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har taraf be-chehragi hai kis ka chehra dekhiye

हर तरफ़ बे-चेहरगी है किस का चेहरा देखिए

ہر طرف بے چہرگی ہے کس کا چہرہ دیکھیے

शायर: Kalim Akhtar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर तरफ़ बे-चेहरगी है किस का चेहरा देखिए
आईना बे-आब है तो आईना क्या देखिए

किस यक़ीं ने किस गुमाँ ने कर दिया है बे-नक़ाब
मेरे होने और न होने का तमाशा देखिए

इक बुलंदी पर पहुँच कर हम सितारे की तरह
ख़ुद चमक जाते हैं तो फिर क्या सितारा देखिए

दूर तक फैला हुआ है नक़्श-ए-सहरा-ए-सुकूत
ज़िंदगी के मोड़ पर ख़ुश-रंग सहरा देखिए

टुकड़े-टुकड़े हो गई है आइनों की ज़िंदगी
अब इन्ही टुकड़ों में 'अख़्तर' अपना चेहरा देखिए