उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ashkon ki ghanghor ghaTa hai

अश्कों की घनघोर घटा है

اشکوں کی گھنگھور گھٹا ہے

शायर: Kalim Akhtar10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अश्कों की घनघोर घटा है
नैन समुंदर काँप रहा है

घोर अंधेरा है तो क्या है
रात का सूरज चमक रहा है

कश्ती कोई डूब न जाए
शोख़ समुंदर उमड रहा है

ज़ुल्म की दुनिया ज़र्द-आलूदा
सब्र की दुनिया सब्ज़-नुमा है

जंगल-जंगल रौशन-रौशन
अपना दिल क्यों बुझा बुझा है

दिल का चेहरा रौशन-रौशन
लगता है महताब हुआ है

दाग़-ए-फ़ुर्क़त और फ़रोज़ाँ
जब भी चराग़-ए-याद जला है

कर्ब की ख़ुशबू और बढ़ेगी
दिल में अब ये फूल खिला है

दुनिया के ग़म भूल गया हूँ
तेरा तसव्वुर होश-रुबा है

'अख़्तर' जी की सुख़नवरी में
रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल बोल रहा है