उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek dushman ko baDe pyar se mehman kiya

एक दुश्मन को बड़े प्यार से मेहमान किया

ایک دشمن کو بڑے پیار سے مہمان کیا

शायर: Kalim Akhtar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक दुश्मन को बड़े प्यार से मेहमान किया
हम ने काँटों से सजे तश्त को गुल-दान किया

हम ने सींचा है दिल-ओ-तन के लहू से इस को
वर्ना ये एक बयाबाँ था गुलिस्तान किया

फिर भी हम तुझ पे लुटाते हैं दिल-ओ-तन का लहू
तेरे रिश्ते ने मगर हम को भी अंजान किया

गाँव भी डूब गया मौज-ए-बला में ऐ दोस्त
अब के बरसात ने हर मौज को तूफ़ान किया

हम ने इंसान को नस्लों में यहाँ बाँट दिया
सय्यद-ओ-शैख़ किया मीर-ओ-मुग़ल ख़ान किया

किस ने तहज़ीब की दीवार गिरा दी 'अख़्तर'
एक इक शहर को कम-बख़्त ने वीरान किया