उर्दू शायरी · ग़ज़ल

miTenge mere dil se ranj-o-gham aahista-ahista

मिटेंगे मेरे दिल से रंज-ओ-ग़म आहिस्ता-आहिस्ता

مٹیں گے میرے دل سے رنج و غم آہستہ آہستہ

शायर: Vijendra Singh Parwaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिटेंगे मेरे दिल से रंज-ओ-ग़म आहिस्ता-आहिस्ता
क़रार आएगा तुझ को चश्म-ए-नम आहिस्ता-आहिस्ता

यक़ीनन एक दिन मंज़िल उन्हीं के पाँव चूमेगी
बढ़ाए जा रहे हैं जो क़दम आहिस्ता-आहिस्ता

हमारे हाल पे इक दिन करम की बारिशें होंगी
फ़ना हो जाएगी रस्म-ए-सितम आहिस्ता-आहिस्ता

अभी तो रफ़्ता-रफ़्ता ये ज़बाँ-बंदी तक आए हैं
फिर इस के बा'द छीनेंगे क़लम आहिस्ता-आहिस्ता

हमारी शायरी 'पर्वाज़' ऐसा सिलसिला ठहरी
किया जिस में ख़यालों को रक़म आहिस्ता-आहिस्ता