उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis-kis ki yaad dil ko satati hai kya kahen

किस-किस की याद दिल को सताती है क्या कहें

کس کس کی یاد دل کو ستاتی ہے کیا کہیں

शायर: Vijendra Singh Parwaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस-किस की याद दिल को सताती है क्या कहें
तन्हाई क्या क्या बज़्म सजाती है क्या कहें

वो इक निगाह जब भी गुज़रते हैं राह से
इसरार कर के हम को बुलाती है क्या कहें

बारीक लब पे उस के तबस्सुम की इक किरन
फ़ित्ने जो सो रहे हैं जगाती है क्या कहें

पहने हुए खड़ी है चराग़ों का पैरहन
अब तीरगी भी जिस्म छुपाती है क्या कहें

दुनिया की कुछ ख़ता है न 'पर्वाज़' मौत की
ये ज़िंदगी ही हम को मिटाती है क्या कहें