उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aansuon ko apni palkon par saja kar le gaya

आँसुओं को अपनी पलकों पर सजा कर ले गया

آنسوؤں کو اپنی پلکوں پر سجا کر لے گیا

शायर: Vijendra Singh Parwaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँसुओं को अपनी पलकों पर सजा कर ले गया
मैं भी उस महफ़िल में कुछ शमएँ जला कर ले गया

एक एक चेहरे से जो नज़रें बचा कर ले गया
वो भी किस अंदाज़ के जल्वे चुरा कर ले गया

जिस्म मेरा है मगर मैं जिस्म में हूँ ही नहीं
एक झोंका याद का ऐसा उड़ा कर ले गया

आइने के सामने इक आइना लगता हूँ मैं
जाने वाला मेरी सूरत तक चुरा कर ले गया

मेरे दिल में जज़्ब हो कर रह गया तेरा वजूद
तू जिसे हासिल वो परछाई उठा कर ले गया

कुछ न पूछो तुम मिरी तख़्ईल की 'पर्वाज़' को
भीड़ में भी भीड़ से दामन बचा कर ले गया