उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaKHir udas-udas tabiat bhi kya kare

आख़िर उदास-उदास तबीअत भी क्या करे

آخر اداس اداس طبیعت بھی کیا کرے

शायर: Vijendra Singh Parwaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आख़िर उदास-उदास तबीअत भी क्या करे
अब मेरा दिल किसी से मोहब्बत भी क्या करे

तपती रही ज़मीन कड़ी धूप में पड़ी
सूरज की रौशनी की शिकायत भी क्या करे

पत्थर बना के छोड़ गए जिस को हम-सफ़र
अब उस के साथ और मुसीबत भी क्या करे

सब जानते हैं ज़ब्त का ज़िम्मा हमीं पे है
बाग़ी नहीं है दिल तो बग़ावत भी क्या करे

लड़ने को जब किसी से मैं तय्यार ही नहीं
'पर्वाज़' मुझ से कोई अदावत भी क्या करे