उर्दू शायरी · ग़ज़ल

duniya mein wahi log bure hain jo bhale hain

दुनिया में वही लोग बुरे हैं जो भले हैं

دنیا میں وہی لوگ برے ہیں جو بھلے ہیں

शायर: Vijendra Singh Parwaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुनिया में वही लोग बुरे हैं जो भले हैं
ढूँडोगे अंधेरे तो चराग़ों के तले हैं

छोड़ा न गया धूप में जिस पेड़ का साया
आँधी में उसी पेड़ से हम बच के चले हैं

ये देखिए फिर भी न बदल पाई ये दुनिया
लोगों ने तो भूलों पे बहुत हाथ मले हैं

वो भी तो हमें छोड़ के रुख़्सत हुए कब के
हम जिन के अँधेरों में चराग़ों से जले हैं

ऊँचाइयाँ हासिल हुईं तक़दीर से जिन को
इक रोज़ वो सब लोग भी सूरज से ढले हैं

तक़दीर ने उन को भी सितारों पे बिठाया
'पर्वाज़' जो इंसान ग़रीबी में पले हैं