उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo tu nahin to ye duniya ruki-ruki si lage

जो तू नहीं तो ये दुनिया रुकी-रुकी सी लगे

جو تو نہیں تو یہ دنیا رکی رکی سی لگے

शायर: Vijendra Singh Parwaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो तू नहीं तो ये दुनिया रुकी-रुकी सी लगे
मैं अपनी शक्ल भी देखूँ तो अजनबी सी लगे

तिरे ख़याल से बढ़ कर कोई ख़याल नहीं
अंधेरे घर में मुझे कैसी रौशनी सी लगे

जो तेरे रूप का चर्चा करूँ बहारों से
तो फूल फूल की रंगत उड़ी उड़ी सी लगे

जो तेरी बाहों में दम तोड़ना मुयस्सर हो
तो मुझ को मौत की आमद भी ज़िंदगी सी लगे

किसी के हुक्म का पाबंद हो के क्या पाया
के अब तो साँस भी आए तो ख़ुद-कुशी सी लगे

तमाम उम्र ये सोचा है शेर कहते हुए
हमारी शाइ'री 'पर्वाज़' शाइरी सी लगे