उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ho gae ruKHsat mere arman aisa kuchh nahin

हो गए रुख़्सत मिरे अरमान ऐसा कुछ नहीं

ہو گئے رخصت مرے ارمان ایسا کچھ نہیں

शायर: Vijendra Singh Parwaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हो गए रुख़्सत मिरे अरमान ऐसा कुछ नहीं
तेरा ग़म दिल में न हो मेहमान ऐसा कुछ नहीं

अच्छे अच्छे तैरने वालों को देखा डूबते
वक़्त की हम को नहीं पहचान ऐसा कुछ नहीं

मैं किसी का हो के तुझ को भूल जाऊँ क्या कहा
सच तो ये है मेरा कहना मान ऐसा कुछ नहीं

अपने अपने रास्ते हैं अपनी अपनी मंज़िलें
तेरी मिट्टी में हो मेरी जान ऐसा कुछ नहीं

ठीक है 'पर्वाज़' हम को मिल न पाईं मंज़िलें
छोड़ दें उम्मीद का मैदान ऐसा कुछ नहीं