उर्दू शायरी · ग़ज़ल

miT gaya hota magar zinda hun tadbir ke sath

मिट गया होता मगर ज़िंदा हूँ तदबीर के साथ

مٹ گیا ہوتا مگر زندہ ہوں تدبیر کے ساتھ

शायर: Naeem Sahil7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिट गया होता मगर ज़िंदा हूँ तदबीर के साथ
रोज़ होता है तमाशा मिरी तक़दीर के साथ

क्या ज़रूरी है कई ख़्वाब सुनहरे देखूँ
'उम्र कट जाती है इक ख़्वाब की ता'बीर के साथ

चंद ग़ज़लें मिरी लोगों की ज़बाँ पर भी थीं
वो मुझे कैसे मिटाता मिरी तहरीर के साथ

वक़्त इंसान के हालात बदल देता है
कब तलक क़ैद रहेगा कोई ज़ंजीर के साथ

चंद लम्हों के लिए रोज़ मैं जी लेता हूँ
जीना मुश्किल भी नहीं ‘इज़्ज़त-ओ-तौक़ीर के साथ

क्यों न हो आप का चर्चा यहाँ महफ़िल महफ़िल
आप छुपते हैं रिसालों में भी तस्वीर के साथ

कामयाबी तिरी क़िस्मत में लिखी है 'साहिल'
दो निशाने हैं तिरे ज़ह्न में इक तीर के साथ