उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq jab mange hai bas sada-dili mange hai

'इश्क़ जब माँगे है बस सादा-दिली माँगे है

عشق جب مانگے ہے بس سادہ دلی مانگے ہے

शायर: Naeem Sahil7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'इश्क़ जब माँगे है बस सादा-दिली माँगे है
हुस्न बे-साख़्ता आशुफ़्ता-सरी माँगे है

आ गया रास ज़माने को जब अंदाज़ मिरा
आईना भी हुनर-ए-शीशा-गरी माँगे हैं

सब की क़िस्मत में कहाँ होता है ख़ुश-रंग हयात
फ़ल्सफ़ा 'इश्क़ का लम्हों से सदी माँगे है

दर्द उठता है तो इक पल में तड़प जाता है
सोख़्ता दिल मिरा संदल की नमी माँगे है

जान जाओगे तो हैरानी तुम्हें भी होगी
कौन किस किस से यहाँ तिश्ना-लबी माँगे है

कहनी पड़ती है ग़ज़ल हस्ब-ए-मरातिब उस के
क़ाफ़िया रोज़ नया हर्फ़-ए-रवी माँगे है

गुमरही क्यों न बढ़े हद से ज़ियादा 'साहिल'
जो भी ना-अहल है वो राहबरी माँगे है