उर्दू शायरी · ग़ज़ल

DhunD leta hai nai rahguzar sham ke baad

ढूँड लेता है नई राहगुज़र शाम के बा'द

ڈھونڈ لیتا ہے نئی راہ گزر شام کے بعد

शायर: Naeem Sahil7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ढूँड लेता है नई राहगुज़र शाम के बा'द
ख़त्म होता नहीं सूरज का सफ़र शाम के बा'द

याद-ए-माज़ी कभी सोने नहीं देती उस को
अपनी तक़दीर पे रोता है खंडर शाम के बा'द

एक ही रंग में कब तक मैं सजाऊँ ग़ज़लें
जागता है कई रंगों में हुनर शाम के बा'द

जिस ने हर गाम पे ज़ालिम की हिमायत की है
घर में रह कर भी उसे लगता है डर शाम के बा'द

दिन तो कट जाता है बाज़ार की ज़ीनत बन कर
दिल पे तन्हाई का होता है असर शाम के बा'द

बे-क़ुसूरों के मकानों से धुआँ उठता है
आग बन जाती है दंगों में ख़बर शाम के बा'द

ख़ुश करूँ किस को मैं 'साहिल' किसे नाराज़ करूँ
सोचना पड़ता है जाऊँ मैं किधर शाम के बा'द