उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri bhanwon ke ain darmiyan ban gaya

मिरी भँवों के ऐन दरमियान बन गया

مری بھنووں کے عین درمیان بن گیا

शायर: Umair Najmi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरी भँवों के ऐन दरमियान बन गया
जबीं पे इंतिज़ार का निशान बन गया

सुना हुआ था हिज्र मुस्तक़िल तनाव है
वही हुआ मिरा बदन कमान बन गया

मुहीब चुप में आहटों का वाहिमा हवा
मैं सर से पाँव तक तमाम कान बन गया

हवा से रौशनी से राब्ता नहीं रहा
जिधर थीं खिड़कियाँ उधर मकान बन गया

शुरूअ' दिन से घर मैं सुन रहा था इस लिए
सुकूत मेरी मादरी ज़बान बन गया

और एक दिन खिंची हुई लकीर मिट गई
गुमाँ यक़ीं बना यक़ीं गुमान बन गया

कई ख़फ़ीफ़ ग़म मिले मलाल बन गए
ज़रा ज़रा सी कतरनों से थान बन गया

मिरे बड़ों ने आदतन चुना था एक दश्त
वो बस गया 'रहीम' यार-ख़ान बन गया