उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere tasawwur mein aa rahe ho

मिरे तसव्वुर में आ रहे हो

مرے تصور میں آ رہے ہو

शायर: Umood Abrar Ahmad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे तसव्वुर में आ रहे हो
मुझे निशाना बना रहे हो

अभी कहानी सुनी नहीं है
ख़याल अपना सजा रहे हो

फ़िराक़ में जो गुज़र गए दिन
उसी में दिल को जला रहे हो

मोहब्बतों में विसाल लाज़िम
मुझे कहानी सुना रहे हो

मैं पहले नादान थी मिरी जाँ
अभी भी पागल बना रहे हो

मुझे ख़सारे में डाल कर तुम
ज़मीर अपना बचा रहे हो

कहीं ये तुम को न मात दे दे
जो चाल अपनी चला रहे हो