उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere qarib raha wo ki mujhse dur raha

मिरे क़रीब रहा वो कि मुझ से दूर रहा

مرے قریب رہا وہ کہ مجھ سے دور رہا

शायर: Balraj Bakhshi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे क़रीब रहा वो कि मुझ से दूर रहा
कोई न कोई त'अल्लुक़ मगर ज़रूर रहा

वो 'आदतन भी सितमगर है कुछ हमेशा से
कुछ इस में मेरी वफ़ाओं का भी क़ुसूर रहा

कोई न छीन ले फिर मुझ से मेरे होश-ओ-हवास
इसी लिए मैं हमेशा नशे में चूर रहा

मिरे ख़िलाफ़ गवाहों में पेश पेश है जो
तमाम 'उम्र उसी पर मुझे ग़ुरूर रहा

वही मिटाएगा नाम-ओ-निशाँ मिरा 'बलराज'
मिरे वुजूद पे जिस को बहुत 'उबूर रहा