उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere KHilaf in mein bahami mashware hue hain

मिरे ख़िलाफ़ इन में बाहमी मशवरे हुए हैं

مرے خلاف ان میں باہمی مشورے ہوئے ہیں

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे ख़िलाफ़ इन में बाहमी मशवरे हुए हैं
ये दोस्त जो एक-एक कर के परे हुए हैं

छतें टपकना भी एक ने'मत है मुद्दतों बा'द
हमारे घर के तमाम बर्तन भरे हुए हैं

कोई इन्हें मार दे तो आधी सज़ा ही पाए
मुझ ऐसे वहशत-ज़दा जो आधे मरे हुए हैं

झुकाव कंधों का कोई तिब्बी मरज़ नहीं है
हम एक नादीदा बोझ इन पर धरे हुए हैं

अंधेरे कमरे में ख़ौफ़-ओ-ख़्वाहिश की कश्मकश है
बड़े हँसे जा रहे हैं बच्चे डरे हुए हैं

उदास माहौल नम फ़राहम किया मुसलसल
बड़ी तग-ओ-दौ से ज़ख़्म कुछ कुछ हरे हुए हैं

मिरा मुक़द्दर है बस तअस्सुफ़ में हाथ मलना
किसी मशक़्क़त से थोड़ी ये खुरदुरे हुए हैं