उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere hi sath hai yakjai meri

मिरे ही साथ है यकजाई मेरी

مرے ہی ساتھ ہے یکجائی میری

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे ही साथ है यकजाई मेरी
ग़नीमत है ये सफ़-आराई मेरी

मैं इक मंज़र मुसलसल देखता था
उसी ने छीन ली बीनाई मेरी

ख़बर है मुतरिब-ए-अय्याम तुझ को
शिकस्ता क्यों हुई शहनाई मेरी

अचानक मुझ में उट्ठा इक बगूला
तबी'अत कर गया सहराई मेरी

यहाँ तक कर लिया मसरूफ़ ख़ुद को
अकेली हो गई तन्हाई मेरी

उजाला बुझ गया सूरज का आख़िर
नज़र पहले तो कुछ धुँदलाई मेरी

उसे मा'लूम हैं मेरे 'अनासिर
उसी के हाथ है भरपाई मेरी