उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mera rishta dil-e-nashad se hai

मिरा रिश्ता दिल-ए-नाशाद से है

مرا رشتہ دل ناشاد سے ہے

शायर: Deepak Kamil5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरा रिश्ता दिल-ए-नाशाद से है
परिंदे को शग़फ़ सय्याद से है

विरासत में नहीं मिलती किसी को
बुलंदी का सफ़र बुनियाद से है

उन्हें इंसाफ़ तो कैसे मिलेगा
जिन्हें मतलब फ़क़त इमदाद से है

हमें क्यों आप से होगी शिकायत
हमारा मसअला तो याद से है

मिरी बच्ची कभी रोए नहीं बस
यही इक इल्तिजा दामाद से है