उर्दू शायरी · ग़ज़ल

milne ka jab kaha to mila dukh hua mujhe

मिलने का जब कहा तो मिला दुख हुआ मुझे

ملنے کا جب کہا تو ملا دکھ ہوا مجھے

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिलने का जब कहा तो मिला दुख हुआ मुझे
मैं ने भी मिल के मुँह पे कहा दुख हुआ मुझे

मैं चाहता था मुझ से बिछड़ कर वो ख़ुश रहे
लेकिन वो ख़ुश हुआ तो बड़ा दुख हुआ मुझे

सस्सी की दास्तान सुनी थी गुज़िश्ता शब
मेरे बलोच दोस्त अदा दुख हुआ मुझे

उस के दिए दुखों पे अलग ग़म-ज़दा था मैं
और इंतिक़ाम ले के जुदा दुख हुआ मुझे

हर ताज़ा दुख पे दोस्त का पुर्सा घिसा-पिटा
बस यार जो ख़ुदा की रज़ा दुख हुआ मुझे

चेहरा तअस्सुरात से 'आरी है इस को छोड़
मेरा यक़ीन कर ब-ख़ुदा दुख हुआ मुझे

तब मुन्कशिफ़ हुआ कि मुझे उस से 'इश्क़ है
जब उस के दुख पे उस से सिवा दुख हुआ मुझे