उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mile jo maut ke Dar se zara najat mujhe

मिले जो मौत के डर से ज़रा नजात मुझे

ملے جو موت کے ڈر سے ذرا نجات مجھے

शायर: Raees Manzar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिले जो मौत के डर से ज़रा नजात मुझे
तो ज़िंदा रक्खे बहुत दिन मिरी हयात मुझे

ये और बात कि छोटा सा ज़ेहन रखता हूँ
बहुत बड़ी नहीं लगती ये काएनात मुझे

नया तो कुछ भी नहीं वक़्त के तसलसुल में
फ़रेब देती है दुनिया-ए-वाक़ि'आत मुझे

जो छा गया था नशा बन के मेरी हस्ती पर
है याद आज भी इक शख़्स का वो साथ मुझे

मैं जिस को रात की रानी की तरह महकाता
कभी नसीब नहीं हो सकी वो रात मुझे

समेट लाती हैं जो ताज़ा-तर मज़ामीं को
पसंद आती हैं 'मंज़र' वो लफ़्ज़ियात मुझे