उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jagta aur jagmagata shahr suna ho gaya

जागता और जगमगाता शहर सूना हो गया

جاگتا اور جگمگاتا شہر سونا ہو گیا

शायर: Raees Manzar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जागता और जगमगाता शहर सूना हो गया
याद क्या उस शख़्स की आई मैं तन्हा हो गया

रात पढ़ने में हुईं मशग़ूल आँखें इस क़दर
नींद ने जब उन पे दस्तक दी सवेरा हो गया

हुस्न का पैग़ाम लाई सुब्ह की पहली किरन
सारा मंज़र दश्त-ओ-दरिया का रूपहला हो गया

चुन लिया जिस को परिंदों ने बसेरे के लिए
ख़ुद-बख़ुद इस पेड़ का साया घनेरा हो गया

आरज़ू ऊँचाइयाँ छूने की थी जिस शख़्स को
एक दिन इतना हुआ ऊँचा कि तन्हा हो गया

सोच की तब्दीलियों की गर्द जब इस पर पड़ी
रफ़्ता रफ़्ता पैरहन लफ़्ज़ों का मैला हो गया

सादा-दिल लोगों के जज़्बों को उभारा इस तरह
हम-नवा 'मंज़र' मिरा सारा क़बीला हो गया