उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri jaanib se talafi hai meri

मेरी जानिब से तलाफ़ी है मिरी

میری جانب سے تلافی ہے مری

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरी जानिब से तलाफ़ी है मिरी
दिन इसे रख ये उदासी है मिरी

शाम लेती है मिरे घर वक़्फ़ा
रात कुछ देर से होती है मिरी

ये जो नुक़्ते सा चमकता है तू
तेरे अतराफ़ सियाही है मिरी

अपनी तस्वीर पे रखता हूँ फूल
सोच लेता हूँ कि बरसी है मिरी

सफ़-ए-अव्वल का सिपाही हूँ मैं
और ये जंग भी पहली है मिरी

आब-ए-इम्काँ ही में रहती है 'राज़'
नाव कब घाट से लगती है मिरी