उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri har baat har suKHan mein hai

मेरी हर बात हर सुख़न में है

میری ہر بات ہر سخن میں ہے

शायर: Paraveen Rai6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरी हर बात हर सुख़न में है
'इश्क़ मेरे रेहन-सहन में है

'मीर' होते गले लगा लेते
ऐसा जादू मिरे कहन में है

सर से पाँ तक खिली हुई हो यूँ
चाँद जैसे खिला गगन में है

अब शराबों में वैसी बात कहाँ
जो नशा हाँ तिरे बदन में है

क्या ग़ज़ब की मिठास लहजे में
क्या अदा चाल और चलन में है

मन की बातें न पढ़ सकीं तुम तो
क्या बताएँ कि क्या ये मन में है