उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekhte hain kab talak ye rog pala jaega

देखते हैं कब तलक ये रोग पाला जाएगा

دیکھتے ہیں کب تلک یہ روگ پالا جائے گا

शायर: Paraveen Rai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देखते हैं कब तलक ये रोग पाला जाएगा
आँख से कब हिज्र का काँटा निकाला जाएगा

आज से कल कल से परसों और सालों साल ही
क्या हमारे वस्ल को ऐसे ही टाला जाएगा

कब न जाने ज़िंदगी का लुत्फ़ आएगा हमें
कब न जाने दिल के अंदर का ये छाला जाएगा

जुर्म ये की आप से हम को मोहब्बत हो गई
अब ज़रा से जुर्म पर क्या मार डाला जाएगा

ज़िंदगी-भर आप ने हम को उछाला है बहुत
मर गया तो क्या जनाज़ा भी उछाला जाएगा