उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chaar din ki ye zindagani mein

चार दिन की ये ज़िंदगानी में

چار دن کی یہ زندگانی میں

शायर: Paraveen Rai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चार दिन की ये ज़िंदगानी में
मोड़ कितने हैं इक कहानी में

राज़ जितने छुपाए रक्खे थे
बह गए आँख के वो पानी में

हाए अल्लाह क्या नज़ारे हैं
कौन आया है राजधानी में

इश्क़ उन को भी आज़माएगा
वो जो बैठे हैं ख़ुद-गुमानी में

मेरा गुलशन उजड़ गया मालिक
बाग़बानों की बाग़बानी में