उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ke soe hue zaKHmon ko jaga jati hai

दिल के सोए हुए ज़ख़्मों को जगा जाती है

دل کے سوئے ہوئے زخموں کو جگا جاتی ہے

शायर: Paraveen Rai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल के सोए हुए ज़ख़्मों को जगा जाती है
याद-ए-माज़ी की हवा जब भी यहाँ आती है

हाल अब ये है कि मरने को हैं आमादा हम
इश्क़ की राह ख़तरनाक हुई जाती है

एक लड़का जो मोहब्बत में मरा जाता है
एक लड़की जो तरस तक भी नहीं खाती है

हम अभी रूह ही होने को चले हैं तू तो
जिस्म से जान निकल कर के कहाँ जाती है

तब कहीं जा के ज़माने का भरम खुलता है
ज़िंदगी जीते जी जब लाश बना जाती है