उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mat meri poshak par dhabba laga

मत मिरी पोशाक पर धब्बा लगा

مت مری پوشاک پر دھبہ لگا

शायर: Nadeem Ajmal Adeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मत मिरी पोशाक पर धब्बा लगा
रंग भरना है तो फिर अच्छा लगा

तीर ले कर बेबसी के हाथ से
घाव अपने हाथ से गहरा लगा

दोस्तों को जश्न की दे कर नवीद
ज़ख़्म अब सीधा नहीं तिरछा लगा

सच नज़र आ जाए तो बख़िया उधेड़
झूट को तशहीर का टाँका लगा

आता जाता आदमी उलझा रहे
शहर में तो आइना मैला लगा

जिस के आगे हो ज़माना सर-निगूँ
उस के पीछे वहम का चीता लगा

सर किसी का दार पर लटका 'अदीम'
दूर से देखा तो वो झंडा लगा