उर्दू शायरी · ग़ज़ल

manzil dikhai de na koi rasta mujhe

मंज़िल दिखाई दे न कोई रास्ता मुझे

منزل دکھائی دے نہ کوئی راستہ مجھے

शायर: D. Raj Kanwal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मंज़िल दिखाई दे न कोई रास्ता मुझे
ले आए हैं कहाँ पे मिरे रहनुमा मुझे

ऐ वक़्त फिर से देना ज़रा आइना मुझे
हैरत से तक रहा है जहान-ए-वफ़ा मुझे

शिकवा रहा किसी से न कोई गिला मुझे
तुम मिल गए तो सारा जहाँ मिल गया मुझे

मैं सो चला था अपने तकब्बुर की छाँव में
अच्छा हुआ जो आप ने चौंका दिया मुझे

कैसे करूँ मैं दिल से जुदा अब मता’-ए-ग़म
ले दे के इक उसी का तो है आसरा मुझे

दुनिया में हर क़दम पे निगाहों की भीड़ थी
रह रह के याद आया तिरा देखना मुझे

इक प्यार की नज़र से यूँही देख कर 'कँवल'
फिर ग़म से कर गया है कोई आश्ना मुझे