उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main qalb-e-ishq hun wahshat ka KHun khinchta hun

मैं क़ल्ब-ए-'इश्क़ हूँ वहशत का ख़ून खींचता हूँ

میں قلب عشق ہوں وحشت کا خون کھینچتا ہوں

शायर: Umair Najmi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं क़ल्ब-ए-'इश्क़ हूँ वहशत का ख़ून खींचता हूँ
इधर उधर से मुसलसल जुनून खींचता हूँ

धकेलता हूँ बदन से धुएँ के साथ मलाल
मैं कश नहीं रग-ओ-पै में सुकून खींचता हूँ

कभी कभी किसी ठंडी सड़क पे रात गए
किसी की दी हुई जर्सी से ऊन खींचता हूँ

शदीद हब्स की ज़द में जब आए ख़ित्ता-ए-चश्म
तब इस ज़मीं की तरफ़ मानसून खींचता हूँ

किसी की याद से बोझल ये तीस भारी दिन
सभी गुज़ारते होंगे मैं जून खींचता हूँ

उदासियों की रगड़ से बना हूँ मक़्नातीस
सो ख़ुद में ग़म का बहुत लौह-चून खींचता हूँ

किसी सहारे की ख़्वाहिश के इस्ति'आरे हैं
ये काग़ज़ों पे जो अक्सर सुतून खींचता हूँ

कोई सितारा-बदन नाम पूछता है तो मैं
'उमैर' बोल के 'नजमी' का नून खींचता हूँ