उर्दू शायरी · ग़ज़ल

maine har zaiche mein dekha hai

मैं ने हर ज़ाइचे में देखा है

میں نے ہر زائچے میں دیکھا ہے

शायर: Faizan Jaffery Al-Khwarzami6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं ने हर ज़ाइचे में देखा है
तू मिरी ज़िंदगी की रेखा है

बात कड़वी है उस की जिस ने भी
ज़ाइक़ा ज़िंदगी का चक्खा है

उस ने ज़र्रीं लिबास के मानिंद
मुझ को खूँटी से टाँग रक्खा है

इक मुसाफ़िर के सब्र-ओ-हिम्मत ने
रास्तों मंज़िलों को परखा है

उस की ज़ुल्फ़ों ने खेलना उड़ना
मौज-ए-बाद-ए-सबा से सीखा है

हुस्न का एक मसअला ये है
उस का लहजा बहुत ही तीखा है